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My way !! or the High way !! ...
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Sakshya
Parallel Sight
About Me
Monday, February 22, 2010
हुज़ूर
हुज़ूर ने सोचा, कि शायद उनके रुख से हम सहम जायेंगे,
हुज़ूर ने ये भी सोचा, कि उनकी खिदमत में हम रुक जायेंगे,
पर हुज़ूर, किसी के रुख की परवाह कब किसी तूफ़ान ने की है,
सहमा हो चाहे, कभी वो कुछ देर, पर क्या उसने कभी रुकने की हिमाकत की है,
एक शेर बाकी है अभी...
1 comments:
Shas
Wednesday, February 24, 2010 12:06:00 AM GMT+05:30
Wah! Wah!
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