Tuesday, July 19, 2016

अनकही

शब्दों से शब्द कहते हैं
तुम्हारे बिना हम अधूरे हैं..

अब किसी और रोज़ सुनेंगे तारीफें किसी और की
आज तो नश्तरों से नश्तर तेज़ कर बैठे हैं।

अनसुनी न रहे कोई दुआ तेरी,
खुदा के साथ सवेरे से पैमाना लिए बैठे हैं।

अब बहुत हुआ ए परवरदिगार इंतज़ार तेरा,
ईंटों को सिरहाने से हम लगा बैठे हैं।

Monday, July 18, 2016

वर्णन: प्रथम चरण


प्रथम प्रहर प्रश्न प्रस्तुत करता है,
कौन है वो, किसके साथ अंक शयन करते हो ?

प्रथम प्रहर पुरुष प्रमाण देता है 
सखी है, संगिनी मेरी, उसी के साथ अंक शयन करता हूँ ।।

द्वितीय द्वार दर्प से द्वंद करता है,
स्वर्ण को त्याग, किसको आलिंगन करते हो ?

द्वितीय द्वार पर द्रव्य दर्शन देता है,
अभिसारिका मेरी, असीमित प्रेम से आलिंगन करता हूँ ।। 

to be continued...


Tuesday, July 05, 2016

तो कुछ अपना लिखना

जब मिले न कुछ, पढ़ने के क़ाबिल,
तो कुछ अपना लिखना,

जब मिले न वास्तव में, कोई पास अपना,
तो कोई सपना लिखना,

न दैन्यं न पलायनम, कह कर भी मन न माने
तो कृष्ण की सुनना,

जब सूझे न हाथ को हाथ, अंतर्मन को कर शांत, 
पुकारना एक बार, कृष्ण दिखेगा तुझे, अपने आस पास,

जब मिले न कुछ, पढ़ने के क़ाबिल,
तो कुछ अपना लिखना ||

Monday, April 18, 2016

चौदहवीं के चाँद सी, सागर के उफ़ान सी,


चौदहवीं के चाँद सी, सागर के उफ़ान सी,
ओस पर थिरकती थी, गुलाब सी महकती थी,
एक परी घर में रहती थी।
जाने किसने बहका दिया, क्या क्या किसीने कह दिया
उसे लोहे का और मुझे मिट्टी का कर दिया ॥

दिल में बिठा कर बरसों, अरमानो से सहलाया था,
चाँद तारों से आँचल को सजाया था,
एक परी को साथ लाया था ।
जाने कौन उसे बहला गया, धूप में दौड़ा कर
उसे लोहे का और मुझे मिट्टी का कर दिया ॥

उम्मीद है की वो नाहक दौड़ना छोड़, खुद को समझ पायेगी
लोहे के कवच से निकल, मिट्टी में भी खिलखिलाएगी,
वो सांझ जल्दी ही आएगी ॥ वो सांझ जल्दी ही आएगी॥

Monday, February 29, 2016

आज चाय में फिर चीनी नहीं है


आज चाय में फिर चीनी नहीं है ,
उफ़, ये दिन फिर से वहीं है।
उड़ कर आ जाता है रोज़ ये दिन,
रात भर सोता नहीं तारे गिन गिन।

आज चाय में फिर चीनी नहीं है ,
अहा, थिरकती रही उम्मीद, थमी नहीं है।
बारिशों में भीगी, भाग कर आई
गोदी में मेरी सिमट, ऐसे ही सोयी।

आज चाय में फिर चीनी नहीं है ,
हश्श, मेले में रोशनी कहीं कहीं है।
छन छन के आती रही चाँदनी ,
शहर आज गर्म नहीं है।

आज चाय में चीनी सही है ,
उंह, ये मीठी फिर भी नहीं है।
उठ रही है भाप बहुत देर से,
चाय अब ठंडी नहीं है।

Tuesday, February 09, 2016

कृष्ण-संयोग


दौड़ता भागता रहा कँहा जा रहा है,
वो देख तेरा कृष्ण यहीं आ रहा है।।

अकेला समझ खुद को क्यों चला जा रहा है
सुन तो सही, तेरा कृष्ण पुकार रहा है।

रुका है किसके लिए इतनी देर से धूप में
दरख़्त के नीचे देख,  तेरा कृष्ण पानी लिए खड़ा है

संयोग 

to be continued

Thursday, February 04, 2016

किसी राह में, किसी मोड़ पर


किसी राह में, किसी मोड़ पर
कही चल ना देना तू छोड़कर, मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र

किसी हाल में, किसी बात पर
कही चल ना देना तू छोड़कर, मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र

मेरा दिल कहे कहीं ये ना हो, नहीं ये ना हो, नहीं ये ना हो
किसी रोज तुझ से बिछड़ के मैं, तुझे ढूँढती फिरू दरबदर

तेरा रंग साया बहार का, तेरा रूप आईना प्यार का
तुझे आ नज़र में छुपा लू मैं, तुझे लग ना जाये कहीं नज़र

तेरा साथ है तो है जिंदगी, तेरा प्यार है तो है रोशनी
कहाँ दिन ये ढल जाये क्या पता, कहाँ रात हो जाये क्या खबर

~ मेरे हमसफ़र - 1970