Sunday, May 21, 2017

चलो कृष्ण अब चलो कृष्ण

बहुत देर से रुके हुए हो 
चलो कृष्ण आज चलते हैं |

बहुत कह लिया बेगानों से 
चलो कृष्ण आज अपनों को सुनते हैं | 

बहुत रह लिए किराये के घोंसलों में
चलो कृष्ण आज दिल ढूँढ़ते हैं |

बहुत शोर है यहाँ सब तरफ़ 
चलो कृष्ण आज अपने गीत गुनगुनाते हैं | 

बहुत उम्मीद से लोग नाम लेते हैं
चलो कृष्ण आज लिख ही देते हैं |

बहुत बहुत हो लिया 
चलो कृष्ण अब चलो कृष्ण !!!!

Sunday, January 01, 2017

पापा, ये जूता बहुत काटता है

पापा, ये जूता बहुत काटता है
सुबह शाम, सोते जागते, हर समय
ये जूता बहुत काटता है ।

जाने कब, कंहा ये जूता मैंने पहना था,
चाह कर भी उतार नहीं पाता हूँ,
पापा, ये जूता बहुत काटता है ।

मुझसे कहा था, "तू बड़ा है ।", इसलिए पहनना होगा ये जूता,
मोज़ो पर मोज़े चढ़ाये मैंने, पर फिर भी,
पापा ये जूता बहुत काटता है ।

to be continued....

Friday, November 25, 2016

वर्णन: सर्व चरण

प्रथम प्रहर प्रश्न प्रस्तुत करता है,
कौन है वो, किसके साथ अंक शयन करते हो ?

प्रथम प्रहर पुरुष प्रमाण देता है 
सखी है, संगिनी मेरी, उसी के साथ अंक शयन करता हूँ ।।

द्वितीय द्वार दर्प से द्वंद करता है,
स्वर्ण को त्याग, किसको आलिंगन करते हो ?

द्वितीय द्वार पर द्रव्य दर्शन देता है,
अभिसारिका मेरी, असीमित प्रेम से आलिंगन करता हूँ ।। 

तृतीय तर्क तृष्णा से तुष्ट होता है
विनम्र हो क्यों तिरस्कृत होते हो ?

तृतीय तर्क  तीक्ष्ण तान देता है 
अक्षम्य को क्षमा कर मंथन करता हूँ ॥ 

चतुर्थ चर्म चौसर पर चिहुँकता है 
धर्म को धारण कर, किसके लिए दाँव लगाते हो ?

चतुर्थ चर्म चहुँ ओर व्याप्त होता है 
कर्महीन कर्म को सत्यापित करता हूँ ॥

घमासान

बहुत दूर तक सूनसान है, जिंदगी न जाने कब से घमासान है ।
छायी न जाने कहाँ तक उदासी है, जिंदगी बहुत रोज़ से प्यासी है ॥

बहुत रोज़ से आँखें जागी हुई है, जाने कब से बस रोई नहीं है ।
ए खुदा इन्हें थोड़ी नींद बख़्श दे, इनमे थोड़ी शर्म रख दे ॥

Monday, October 24, 2016

Salt n Pepper

It's always been salt n pepper...do not know what took me so long to realize it again....anyhow now since it's been sorted once more...life is here to ride... :)

a new day...with the revelations of course...

Salt n Pepper...45 days....21 days to pour the habit...21 days to bounce... and 3 days to rake it all...

remember ...it Salt n Pepper always...


Tuesday, July 19, 2016

अनकही

शब्दों से शब्द कहते हैं
तुम्हारे बिना हम अधूरे हैं..

अब किसी और रोज़ सुनेंगे तारीफें किसी और की
आज तो नश्तरों से नश्तर तेज़ कर बैठे हैं।

अनसुनी न रहे कोई दुआ तेरी,
खुदा के साथ सवेरे से पैमाना लिए बैठे हैं।

अब बहुत हुआ ए परवरदिगार इंतज़ार तेरा,
ईंटों को सिरहाने से हम लगा बैठे हैं।

Tuesday, July 05, 2016

तो कुछ अपना लिखना

जब मिले न कुछ, पढ़ने के क़ाबिल,
तो कुछ अपना लिखना,

जब मिले न वास्तव में, कोई पास अपना,
तो कोई सपना लिखना,

न दैन्यं न पलायनम, कह कर भी मन न माने
तो कृष्ण की सुनना,

जब सूझे न हाथ को हाथ, अंतर्मन को कर शांत, 
पुकारना एक बार, कृष्ण दिखेगा तुझे, अपने आस पास,

जब मिले न कुछ, पढ़ने के क़ाबिल,
तो कुछ अपना लिखना ||